Cover of MULYA, PARYAVARAN AUR MANAV ADHIKAR KI SHIKSHA

MULYA, PARYAVARAN AUR MANAV ADHIKAR KI SHIKSHA

IInd EDITION

JAI SHREE

Year: 2026 impression

Bibliography:

294+x, First Published 2007

ISBN: 9789349637375 (HB) · Hardback

Price: Rs. 1,800

ISBN: 9789349637092 (PB) · Paperback

Price: Rs. 695

‘मूल्य पर्यावरण एवं मानव अधिकारों’ पर लिखी यह पुस्तक, विद्यार्थियों का सही मार्गदर्शन करने के उद्देश्य से लिखी गई है| इस पुस्तक में मानव मूल्यों की प्रकृति और गैर मूल्यों के स्रोत पर्यावरण व मानव अधिकार के बारे में ज्ञान पाने के लिए विभिन्न प्रकार के मानव मूल्यों का वर्गीकरण किया गया है और शिक्षक मूल्यों के स्रोत जैसे प्रजातांत्रिक धर्म से अलग और सामाजिक इत्यादि की चर्चा है| विद्यार्थियों की सुविधा के लिए पुस्तक को 4 भाग और 11 अध्याय में बांटा गया है| इसके साथ-साथ नवीनतम तथा रोचक सामग्री और शीर्षक जुड़े हुए हैं| यह पुस्तक शिक्षा के छात्रों के लिए उपयोगी रहेगी ऐसी आशा करते हैं|

 

 

डॉ जयश्री ने शिक्षा में पीएचडी, कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी कुरुक्षेत्र से की और तृषा कॉलेज ऑफ़ एजुकेशन, हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश में शिक्षक पद से जुड़ी रही हैं| उनको अध्यापकीया जीवन का लंबा अनुभव है और शीर्ष पदों पर भी कार्यरत रही हैं| उन्होंने कई सेमिनार व सम्मेलनों में भी भाग लिया है|

खण्ड - I

1. मानवीय मूल्यों: अवधारणा, प्रकृति, वर्गीकरण एवं शिक्षा के लिये आवश्यकता

मूल्य का अर्थ, मूल्यों का विभिन्न अर्थ, मूल्यों की परिभाषाएँ, मूल्यों की प्रकृति, मूल्य निर्धारण की प्रक्रिया, मूल्यों के लक्षण, मूल्यों का सापेक्षिक महत्व, मूल्यों का वर्गीकरण, मूल्य: खोज के प्रयास, शिक्षात्मक मूल्यों से सम्बन्धित दो विचार, शिक्षात्मक मूल्यों का आधुनिक वर्गीकरण, शिक्षात्मक मूल्यों का योगदान, मूल्य-चयन के सिद्धान्त अथवा मूल्यों की प्राथमिकता, शिक्षात्मक मूल्यों को उत्तरोत्तर क्रम, शिक्षात्मक मूल्य-शिक्षा-उद्देश्यों के निर्धारक, मूल्य-उन्मुख शिक्षा की आवश्यकता, कुछ विचार, मानवीय मूल्यों की शिक्षा–साधन और विधियाँ

2. पांच सार्वजनीन मूल्याबोध: प्रेम, सत्य, सदाचार, शान्ति और अहिंसा

प्रेम, प्रेम और अहिंसा, प्रेम निःस्वार्थ है, अन्तः प्रवाह, प्रेम एवं एएच, प्रेम के आनुषंगिक मूल्य (उपमूल्य), प्रेम एक ऊर्जा, सत्य, निष्पक्षजन्य सत्य, परम (निरपेक्ष) सत्य – पूर्ण सत्य, आन्तर्निहित दिव्यत्व, आनुषंगिक मूल्यों (उपमूल्यों) का अनुक्रम, सत्य का स्वरूप, सत्य के सिद्धान्त, धर्म-सदाचार, नैतिक अधिकार एवं कर्तव्य, नैतिक अधिकार, नैतिक कर्तव्य, प्रकृति धर्म, धर्म एवं 3 एच, आनुषंगिक मूल्य (उपमूल्य : कौशल), शांति, इच्छाएँ, बुद्धि की भूमिका, परम चेतन मन, शांति के आनुषंगिक मूल्य (उपमूल्य), शांति स्थापना के उपाय, शांति के लिये अन्य सुझाव, अहिंसा, सृष्टि की एकता, अहिंसा और सत्य, इच्छाओं पर नियंत्रण

3. मूल्यों के स्रोत: सांस्कृतिक, संवैधानिक और धार्मिक-आध्यात्मिक

संस्कृति:- मूल्य के स्रोत के रूप में, संस्कृति की धारणाएँ, संस्कृति एवं मूल्य, परिभाषाएँ, संस्कृति के तत्व, संस्कृति की विशेषतायें या गुण, संस्कृति के प्रमुख भाग, भारतीय संस्कृति की विशेषताएँ, संस्कृत का शिक्षा से परस्पर सम्बन्ध एवं प्रभाव, संस्कृति का शिक्षा पर प्रभाव, संस्कृति और शिक्षा में सम्बन्ध, संस्कृति के प्रति शिक्षा के कार्य, संस्कृति के माध्यम से मूल्यों का सृजन, शिक्षा से सम्बन्धित संवैधानिक धारणाएँ/व्यवस्थाएँ, हमारे संविधान की प्रस्तावना, भारत में शिक्षा-सम्बन्धी संवैधानिक प्रावधान, संविधान के माध्यम से मूल्यों का विकास, प्रजातन्त्र का महत्व, धर्म : मूल्य के स्रोत के रूप में, धार्मिक एवं नैतिक शिक्षा प्रदान करने के साधन, धर्म : मूल्य के स्रोत के रूप में, धर्म के माध्यम से मूल्यों का सृजन

खंड-II

4. मूल्य शिक्षा की विधियाँ: प्रत्यक्ष, परोक्ष एवं एकीकरण

मूल्य शिक्षा की व्याप्ति, हमारे विद्यालयों में मूल्य-शिक्षा की उपेक्षा, मूल्य शिक्षा के कर्त्तव्य निर्देशक नियम, मूल्यों की शिक्षा और विद्यार्थी का सांवेगिक विकास, परोक्ष मूल्य शिक्षक, भाषा-शिक्षण द्वारा मूल्यों की शिक्षा, अभिरूपित का विकास करना, सदप्रवृत्तियों का विकास करना, प्रत्यक्ष मूल्य शिक्षा की विधियाँ, मूल्यों की शिक्षा में पाठ्य-सहगामी क्रियाओं की भूमिका, पाठ्य-सहगामी क्रियाओं का आयोजन: वर्गभान स्थिति, पाठ्य-सहगामी क्रियाएँ तथा मूल्यों का विकास, मूल्य शिक्षा की एकीकरण विधियाँ, उदाहरण पाठ, मूल्य-पत्रक: 1, मूल्य-पत्रक: 2, मूल्य-पत्रक: 3, मूल्य-पत्रक: 4।

5. पर्यावरण: अर्थ, क्षेत्र, पर्यावरण शिक्षा के सिद्धान्त और उद्देश्य

पर्यावरण का अर्थ, पर्यावरण की परिभाषायें, पर्यावरण की संरचना, जैविक पर्यावरण, पर्यावरण का सम्बन्ध अध्ययन विषयों से, पर्यावरण, मनुष्य और पर्यावरण, आनुवंशिकता और पर्यावरण, सामाजिक तथा सांस्कृतिक निर्धारक, पर्यावरण के घटक, पर्यावरण एवं समाज, पर्यावरण तथा राजनीति, पर्यावरण शिक्षा का अर्थ एवं परिभाषा, पर्यावरण शिक्षा का अर्थ, पर्यावरण शिक्षा की परिभाषायें, पर्यावरण शिक्षा के सिद्धान्त, पर्यावरण शिक्षा के उद्देश्य, पर्यावरण शिक्षा की विशेषताएं, पर्यावरणीय शिक्षा का महत्व।

6. पर्यावरण प्रदूषण: प्रकार, कारण और निराकरण

पर्यावरणीय प्रदूषण अर्थ एवं परिभाषा, प्रदूषक, प्रदूषक के प्रकार, वायु प्रदूषण के कारण, वायु प्रदूषण नियंत्रण के उपाय, जल प्रदूषण, जल प्रदूषण के मुख्य कारण, जल शुद्धिकरण के कुछ उपाय, जल प्रदूषण रोकने के उपाय, मृदा प्रदूषण, मृदा प्रदूषण के मुख्य कारण, मृदा प्रदूषण को रोकने के उपाय, सागरीय प्रदूषण, शोर या ध्वनि प्रदूषण, शोर या ध्वनि प्रदूषण का नियंत्रण, जैव प्रदूषण, जैव प्रदूषण के कारण, तापीय प्रदूषण, तापीय प्रदूषण के कारण, तापीय प्रदूषण के सुरक्षा उपाय, कूड़े-कचरे से प्रदूषण, सुरक्षा के उपाय, न्यूक्लीयर प्रदूषण, नियंत्रण।

खंड-III

7. पर्यावरणीय प्रकोप अथवा आपदा के कारण एवं प्रभाव

पर्यावरणीय प्रकोप का अर्थ एवं परिभाषा, पर्यावरणीय प्रकोपों के कारण एवं प्रभाव, प्राकृतिक कारणों से प्रकोप, भूकम्प प्रकोप, ज्वालामुखी प्रकोप, भूस्खलन, उष्ण कटिबन्धी चक्रवात तथा स्थानीय तूफान, बाढ़ प्रकोप, सूखा प्रकोप, मानव-जनित प्रकोप, जनसंख्या विस्फोट के कारण प्रकोप, आपदाओं पर नियंत्रण, ग्लोबी एवं स्थानीय स्तर पर प्रदूषण तथा उसके सुधार, 'पर्यावरण एवं विकास' पर संयुक्त राष्ट्र रियो सम्मेलन: 3-14 जून, 1992, संयुक्त राष्ट्र 'मानव पर्यावरण' पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन की घोषणाएँ।

8. पर्यावरण संरक्षण तथा संविकास या टिकाऊ विकास में विद्यालय की भूमिका एवं कार्य

पर्यावरणीय संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण में विद्यालय की भूमिका, शिक्षाविदों द्वारा विद्यालय के पर्यावरण संरक्षण सम्बन्धी कार्य, पर्यावरण संरक्षण सम्बन्धी अन्य कार्य, पर्यावरणीय विकास में स्कूल का प्रभाव, टिकाऊ विकास में विद्यालय की भूमिका, टिकाऊ विकास के प्रमुख पहलू: टिकाऊ विकास हेतु भारत सरकार के कार्य, वन्य जीव संरक्षण की अन्य परियोजनाएं, टिकाऊ विकास एवं पारिमित्र तकनीकी, पारिमित्र तकनीकी, पर्यावरण प्रभाव का मूल्यांकन एवं कानून, पर्यावरण संरक्षण कानून

9. मानव अधिकार: अवधारणा, आधार और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

मानव अधिकार की अवधारणा, मानव अधिकारों के प्रकार, मानव अधिकार के आधार, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, संयुक्त राष्ट्र संघ तथा मानव अधिकार, मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा और भारतीय संवैधानिक प्रावधान, घोषणा-पत्र का मूल्यांकन, अंतर्राष्ट्रीय अधिकार बिल, भारतीय अधिकार बिल का मूल्यांकन, मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा, मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा की उद्देशिका, महासभा, भारतीय संवैधानिक प्रावधान, मौलिक अधिकारों का महत्व, भारत में मौलिक अधिकार, भारतीय मौलिक अधिकारों की प्रकृति अथवा विशेषतायें

10. माध्यमिक स्तर पाठ्यक्रम में मानव अधिकारों की शिक्षा

मानवाधिकार शिक्षा, मानवाधिकार शिक्षा एवं शिक्षण के लक्ष्य, मानवाधिकार शिक्षण पाठ्यक्रम, मानवाधिकार सम्बन्धित पाठ्य पुस्तकें, मानवाधिकार शिक्षा के लिये क्रियाएं, शिक्षक की भूमिका

11. मानव अधिकारों का पालन कराना, प्रेस की भूमिका, राष्ट्रीय आयोग प्रशासकीय ढांचा, एवं स्वैच्छिक संस्थाएं

क्रियान्वयन की आवश्यकता, विकासशील देशों में स्थिति, सुझाव, मानवाधिकार और प्रेस तथा मीडिया, प्रेस की स्वतंत्रता का महत्व, स्वतंत्रता की सीमायें, लोकतन्त्र का चौथा स्तम्भ, प्रेस का अनुशासन, राष्ट्रीय आयोग की भूमिका, राज्य स्तर पर प्रशासकीय ढांचा, स्वैच्छिक संस्थाओं की भूमिका, बन्दियों के मानवाधिकार, अन्तर्राष्ट्रीय न्यायिक व्यवस्था

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